बरेली में ‘डिनर पॉलिटिक्स’ फेल, वकीलों ने दिखाया लोकतंत्र का असली चेहरा

बार काउंसिल चुनाव में महफूजुर रहमान फैजी को सिर्फ 7 वोट, सपा समर्थित इमरान उल्ला को 92—मतदाताओं ने नेताओं नहीं, समझदारी को चुना

रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी

बरेली। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव ने बरेली की राजनीति और वकालत जगत में एक बड़ा संदेश दे दिया है यहां का मतदाता अब सिर्फ भीड़ नहीं, बल्कि समझदार फैसला लेने वाला जागरूक नागरिक है।
निर्दलीय प्रत्याशी महफूजुर रहमान फैजी को बरेली से महज 7 वोट मिलना इस बात का साफ संकेत है कि स्थानीय स्तर पर आयोजित बड़े-बड़े रात्रि भोज और राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन वकीलों को प्रभावित नहीं कर सका। जिस सपा नेता ने फैजी के समर्थन में बड़े होटल में डिनर आयोजित कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत दिखाने की कोशिश की थी, वह सपना चुनाव परिणाम के साथ ही टूटता नजर आया।
वहीं दूसरी ओर सपा समर्थित प्रत्याशी इमरान उल्ला को 92 वोट मिलना इस बात का प्रमाण बन गया कि समाजवादी पार्टी का वोट बैंक आज भी पार्टी नेतृत्व, खासकर अखिलेश यादव के नाम पर मजबूती से खड़ा है। यह चुनाव परिणाम साफ तौर पर दर्शाता है कि मतदाता किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव में नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक सोच और प्राथमिकताओं के आधार पर वोट करता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक और महत्वपूर्ण संकेत दिया है बरेली का मतदाता कार्यक्रमों में भीड़ के रूप में जरूर शामिल होता है, लेकिन वोट देने के समय वह पूरी तरह स्वतंत्र और सजग रहता है। बड़े आयोजनों और भोज के जरिए वोट प्रभावित करने की कोशिशें अब असर खोती नजर आ रही हैं।
शहर में इस बात की भी चर्चा तेज है कि सपा से जुड़े एक नेता द्वारा पार्टी समर्थित प्रत्याशी की अनदेखी कर निर्दलीय प्रत्याशी का समर्थन करना आने वाले समय में उनके लिए राजनीतिक मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
कुल मिलाकर, बार काउंसिल चुनाव ने यह साबित कर दिया है कि बरेली में लोकतंत्र सिर्फ दिखावे का नहीं, बल्कि जागरूकता और समझदारी का है, जहां वोट की कीमत को मतदाता भली-भांति समझता है।

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